Project Report on Post partum haemorrhage , Nursing Project ,Bsc nursing project


Post partum haemorrhage


Introduction- Post partum haemorrhage  : प्रसव की तृतीय अवस्था की जटीलता है जिसमे असामान्य  रक्तस्त्राव होता है यह एक जटीलता है। जिसका तुरंत प्रबंधन करना आव्श्यक होता है। यह शिशु के जन्म बाद कभी भी हो सकती है।


Definition –
1.     Acc. To shurekha kumari meena and Hemedra kumar meena :- शिशु के जन्म के बाद से लेकर 6 सप्ताह  के मध्य होने वाला असामान्य रक्तस्त्राव जिसके कारण रोगी को General condition प्रभावित होती है post partum Haemorrhage कह्लाता है।
2.     Acc. Preeti Agrwal ,vinod gupta ,yogesh guptaगर्भस्थ शिशु के जन्म के बाद 500 ml से ज्यादा रक्तस्त्राव होना post partum haemorrhage कह्लाता है

Classification {वर्गीकरण }:-
PPh मे होने वाली beelding  के समय के आधार पर इसके निम्न्प्रकार है:-
1.प्राथमिक प्रसव पश्चात् रक्तस्त्राव {Primary PPh}
      2.व्दितीयक प्रवस पश्चात रक्तस्त्राव {secondary PPH}
1.Primary pph:- यदि Bleeding शिशु के जन्म के बाद प्रथम 24 घंटे के अंदर होती है तो यह primnary post partum haemorrage कहलाता है। इसे early pph भी कहते है। primary pph ke दौरान अधिकांश bleeding शिशु के जन्म के बाद प्रथम २ घंटे के अंदर हो जाती है primary pph दो प्रकार का होता है।
A.Third stage Haemorrhage :- यदि Bleeding Placental expulsion से पूर्व होती है तो यह 3rd stage pph कहलाती है।
B.वास्तविक प्रसव पश्चात् रक्तस्त्राव :- {true pph} यदि Bleeding Placental
Expulsion के बाद होती है तो यह वस्तविक PPH कहलाता है यह सबसे आधिक पाया जाने वाला PPH कहलाता है।
2.Secondary PPH :- bleeding शिशु के जन्म के २४ घंटे बाद होती है तो यह Secondary pph कहलाती है ।

कारण {Etiology}
गर्भाशय मे संकुचन बंद होना {Atonic Uteros} :- वह स्थिति जिसमे Uterus की myometrium मे contractyion एवम्  Retraction उत्पन्न नही होते है जिसके  परिणाम स्वरुप  अपरासन्योजन स्थल {Placental site} पर क्षतिग्रस्त   Blood vessels से लगातार Bleeding होती है। Atonic uteus कहलाती है ।uterine contractions के कारण Placental site पर Blood Flow अधिक होता है {लगभग् 500-800ml प्रति मिनट } साथ ही Placental separation के समय क्षतिग्रस्त   Endometril blood vessels से होने वाली Bleeding को रोकने के लिऐ Effective uterine contraction आवश्यक होते है आत: uterineAtony या Atonik uterus की परिस्थिति मे तीव्र Bleeding होती है जिसे PPH माना जाता है uterine atony के निम्न कारण होते है :-
·        प्लेसेंटा का पूरी तरह अलग न हो पाना  |
·        प्लेसेंटा का कुछ भाग अन्दर रह जाना |
·        अत्यधिक तेज प्रसव होना |
·        अत्यधिक लम्बा प्रसव होना |
·        Multiple pregnancy|
·        प्लेसेंटा प्रिविया |
·        प्लेसेंटा का समय पुर्व विलय होना |
·        सामान्यत: पूर्ण बेहोशी कि स्थिति में |
# इसके अतिरिक्त निम्न परिस्थितियों में भी pph कि संभावना अधिक होती है|
·        Previous History of PPH
·        Grandmultiparity  
·        Anemia
# माँ को हीमोफीलिया रोग होना |

लक्षण {Clinical manifestation} :-
·        तीव्र रक्तस्त्राव होना
·        Matenal distress
·        धड़कन तेज होना {Torchy cardia Pulse }
·        Blood Pressure कम होना
·        बेचैनी
·        बेहोशी
·        तेज दर्द होना
·        तीव्र कमजोरी आना
·        Uterus blood से भरा होना पर “bag”कि तरह Palpate किया जा सकता है ऐ ऐवं Compress करने पर Vaginal bleeding होती है
·        संक्रमण होने पर Fever हो सलता है |

·        Medical Management :-
1 Oxytocin
Action :- Stimulates uterine smooth Muscle ,Producing uterine contractions Similar to those in spontaneous Labor.
Indication :-
=>Postpartum control of bleeding after expulsion of tha placenta .
Contraindication And Precautions –
=>Hypersensitivity ,Anticipated Nonvaginal delivery .Pregnancy.
Route and Aosage :-
=>I.V { Adults} ;-10 units infused at 20-40 milliunits / Min .
=>I.M { Adults} ;- 10units after delivery of Placenta.
Side effects :-
=>Maternal adverse Reaction are noted Far I.V.use only .
=>C.N.S.=>Coma seizures
=>Resp =>Asphyxia ,Hypoxia
Nursing Responsbility   ;-
1.Fetal Maturity Presentation and Pelvic adequacy should beassessed prior to administration of oxytocin Far in duction of Labor.
=>Mnitor Maternal blood Pressure and Pulse Frequently and Fetl heart Rate continuously throughout administration .
2.महिला को I.V.FluidsProvide  करेगें |

   Management :-
1.तृतीय अवस्था रक्तस्त्राव का प्रबंधन |
२.चोट के कारण हुए प्रवस पश्चात रक्तस्त्राव का प्रबंधन
३.वास्तविक प्रवस पश्चात रक्तस्त्राव का प्रबंधन |
४ .द्व्तीयक प्रवस पश्चात रक्तस्त्राव का प्रबंधन |
Management of third stage haemorrhage
·        सामान्य प्रबंधन { General Management }
ð महिला को अकेला नही छोड़े तथा उसे लगातार observation में रखना चाहिए |
ð महिल के vital signs check करते है तथा general health status को assess करे |
ð सभी आपातकालीन उपकरण तैयार रखे |
ð महिला तथा उसके परिजनों को मनोवैज्ञानिक सहारा प्रदान करे                                 
·        वास्तविक प्रबंधन { Actual Managament }
ð गर्भाशय को खाली करना :-गर्भाशय को संकुचित करने के लिय इसे उत्तेजित करना आवश्यक होता है और यह तभी अच्छी प्रकार से हो सकता जब गर्भाशय खली हो अत: यदि प्लेसेंटा तथा रक्त के थक्के गर्भाशय  में  मौजूद हो तो इन्हे बाहर निकालना चाहिए |
ð गर्भाशय कि मालिश करना ;-जब तक गर्भाशय संकुचित नही होने तक मालिश करनी चाहिए |
ð महिला को कैथेटराइज करना ;- यदि महिला मूत्राशय भरा हुआ है तो इसे खाली करने के लिए महिला के कैथरेटर लगाना चाहिए क्योकि भरा हुआ मूत्राशय strong गर्भाशयिक संकुचित को रोकता है |
ð आवश्यकतानुसार महिला को sedative दवाईयां जैसे –Morphini देनी चाहिए|           
2.Management of traumatic PPH
यदि गर्भाशय कि मालिश करने पर इसके hard हो जाने के पश्चात भी रक्तस्त्राव जारी रहता है तो यह जनननाल में चोट के कारण होने वाले प्रसव पश्चात रक्तस्त्राव को इगित करता है |ऐसी स्थिति में प्लेसेंटा के निष्कासन के बाद महिला को general anaesthesia देकर utero-vaginal canal को खाली को खाली किया जाता है तथा फटन वाले स्थानों पर टाँके लगा दिये जाते है |
3.     Mnagemant of truePPH
प्लेसेंटा के निष्कासन के पश्चात परन्तु शिशु के जन्म के बाद २४ घंटे के अन्दर होने वाला रक्तस्त्राव वास्तविक प्रवस पश्चात रक्तस्त्राव कहलाता है |
TruePPHका प्रबंधन दो प्रकार से किया जाता है |
{A} Atonic uterus  के दौरान प्रबन्धन :-
=>महिला को आक्सीतोसिक दवाइयाँ जैसे मिथारजीन ०.२mg I.V. मार्ग द्वारा देनी चाहिए |
=>यदि महिला का urinary bladder भरा हुआ हो तो कैथेटर लगाकर इसे खाली करना चाहिए |
=>महिला के आक्सीजन ड्रिप पारंभ क्र देनी चाहिए | यदि उक्त प्रबन्धन के बावजूद भी गर्भाशय atonic रहता है तो मरीज का निम्न उपचार किया जाता है |
=>मरीज को जनरल ऐनेस्थासिया देकर गर्भाशय कि जाचं की जाती है साथ ही जनननाल का किसी चोट की उपस्थिति के लिए परीक्षण किया जाता है
प्लेसेंटा स्थान को दबाने की द्वि - ह्स्तविधि ;-
1.दोनों हाथो को अच्छी तरह से एन्टीसेप्टिक घोल से  साफ़ कर लिया जाता है | तथा GALVES पहन लिये जाते है |
2. एक हाथ के द्वारा लेबिया को separate कर तथा दुसरे हाथ को नुकीले आकार में बनाकर योनिमार्ग में प्रविष्ट कर दिया जाता है |

PPH को नियन्त्रण करने के सर्जिकल मैथड  :-
यदि उक्त प्रबन्धन के बाद भी रक्तस्राव नही रुकता है तो निम्न में से किसी एक या एक से अधिक surgical methods द्वारा रक्तस्राव को रोका जा सकता है |
ð Bilateral ligation of uterine arteries .
ð Ligation of utero-ovarine anastomosis vessels.
ð Unilateral or bilateral ligation of internal iliac artery.
ð Angiogrophic arterial embolisation .
यदि उक्त सभी methods को अपनाने के बाद भी bleeding stop नहीं होती तो अंत में महिला के गर्भाशय को surgically remove कर दिया जाता है इस प्रक्रिया को hysterectomy कहते है |
{B} Traumatic PPH ke दौरन प्रबन्धन ;-
गर्भाशय के hard तथा संकुचित { contracted } होने के बाद भी लगातार रक्तस्राव का होना traumatic pph को इंगित करता है ऐसा होने पर speculum की सहायता से पेरिनियम ,योनि, सरविक्स आदि का अच्छी तरह से परीक्षण कर चोट का पता लगाया जाता है | तथा फटने वाले स्थानों पर suturing कर दी जाती है |
Management of secondary PPH
शिशु के जन्म 24 घंटे बाद से लेकर सूतिकावस्था की समाप्ति  तक होने वाला रक्तस्राव द्वातियक प्रवस पश्चात रक्तस्राव कहलाता है |प्लेसेंटा अथवा झिल्लीयो के कुछ भागो का गर्भाशय में ही रह जाना secondary PPH का सबसे प्रमुख
कारण होता है |
Secondary pph का प्रबंधन;-
ð महिला में blood loss  के मात्रा तथा उसकी general health status को assess करना चाहिए |
ð महिला के vital singn चैक करने चाहिए |
ð महिला तथा उसके परिजनों को मनोवैज्ञानिक सहारा प्रदान करना चाहिए | आवश्यकतानुसार BLOOD TRANSFUSION करना चाहिय |
Preventive measures {रोकथाम के उपाय}
प्रसव पश्चात रक्तस्राव परिप्रसव मृत्यु  {perinatal mortality}  का एक प्रमुख कारण है अत: इससे होने बाली death  की संख्या को कम करने के लिऐ इसकी रोकथाम हेतु विभिन्न उपाय किये जाने चाहिए |
[a] गर्भावस्था के दौरान उपाय :-
=> गर्भवती महिला हीमोग्लोबिन स्तर को सामान्य से अधिक बनाये रखना गर्भावस्था के दौरान महिला के हीमोग्लोबिन स्टार प्रत्येक ट्राइ मेस्टर के दौरा कम से कम एक एक बार जांच करनी चाहिए|
=> ऐसी महिलाऐ  जिनमे पूर्ब में pph की history  रही हो उनकी delivery भी आधुनिक उपकारणों से सुसज्जित अस्पताल में अनुभवी चिकित्सको द्वारा करवानी चाहिए | ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति को प्रभावी ढंग से manage किया जा सके |
=> गर्भवती महिला को नियमित रूप से प्रसव पूर्व भेट करने की सलाह देनी चाहिए तथा प्रत्येक visit के दौरान विभिन्न परीक्षण करने चाहिए|
{B} प्रसव प्रकिया के दौरान उपाय  :-
=> गर्भस्थ शिशु की delivery में किसी भी प्रकार की अनावश्यक जल्दबाजी नही करनी चाहिये तथा delivery धीरे-धीरे एवं सावधानीपूर्वक करनी चाहिए |
=> उच्च जोखिम युक्त महिलाओं की delivery के समय cross mathed रक्त तैयार रखना चाहिये |
=>प्रसव की द्वातिय अवस्था के दौरान आवश्यकतानुसार एपिजिओटोमी करनी चाहिए |
  => delivery के पश्चात महिला को लगभग दो घंटे तक observe करते रहना चाहिए | तथा इस बात को सुनिश्चित कर लेना चाहिये | कि गर्भाशय hard तथा contracted हो महिला के vital sign भी चैक करने रहना चाहिये |

Nursing process :-  

 Assessment :-
1.मरीज की वर्तमान समस्या परिवारिक समस्या और सामान्य इतिवृति का पता लगाना |
2.मरीज के चिन्ह एवं लक्षणों का मूल्यांकन करना |
3. मरीज के तरल का मूल्यांकन करना |
4. मरीज के दर्द का मूल्यांकन करना |
5. मरीज को मनोवैज्ञानिक स्तर का मूल्यांकन करना
Nursing Diagnosis :-
महिला को ब्लीडिंग के दौरान दर्द होना |
Goal and Planning :-
महिला के दर्द को कम करना |
Intervention :-
ð महिला को दर्द कम करने के लिए analgesic drug provide  करेंगे |
ð महिला को oxytocin drug provide करेंगे |
ð महिला को आरादायक position प्रदान करे साथ ही थोड़े – थोड़े समय पर  इसे change करते रहें |
ð महिला को प्रोत्साहित करें |
Nursing Diagnosis :-
  शारीरिक आवश्कता से कम पोषण मिलना  |
Goal and Planning  :-
 महिला के पोषण स्तर को सामान्य बनाये रखना |

Intervention :-
ð महिला के nutrition level का assessment करें |
ð गंभीर मामलो में I.V.Fluid द्वारा रोगी का water and electrolyte balance maintain करें |
ð महिला के लिये  meun planning करते समय उसकी पसंद ना पसंद का ध्यान रखना चाहिए |
ð महिला को additional vitamin and meneral provide करें |

Nursing diagnosis :-
  महिला में anxiety को कम करना |

Intervention :-
ð महिला तथा उसके परिजनों को मनोवैज्ञानिक सहारा प्रदान करना |
ð महिला को लगातार देखभाल प्रदान करना |
ð महिला को अकेला न छोड़े |
ð महिला की शंकाओ को दूर करने का प्रयास करना |
ð महिला के साथ मित्रवत व्यवहार करें |

3 . Nursing diagnosis :-
  महिला को थकावट महसूस होना |
Goal and planning :-
महिला के थकान को कम करना |                              
.Intervention :-
ð महिला को बीच –बीच में सदा पानी पीना फलो का रस चिप्स आदि देते रहें |
ð महिला को आरामदायक position प्रदान करें |   
4.Nursing diagonosis :-
     संक्रमण का ख़तरा
Goal and planning :-
संक्रमण की संभावना को कम करना |
Intervention :-
ð प्रत्येक नर्सिंग प्रक्रिया के दौरान strictasepic तकनीक का उपयोग करना चाहिए |
ð काम में लिए जाने वाले सभी उपकरण विसंक्रमित होने चाहिए |
ð महिला को पेरिनियल क्षेत्र को स्वच्छ रखना |
ð प्रत्येक नर्सिंग प्रक्रिया से पहले तथा बाद में साबुन पानी से अच्छी तरह से हाथ धोने चाहिए |
5.Nursing diagnosis :-
 महिला की व्यक्तिगत स्वच्छता को बनाए रखना |
Intervention :-
ð पेरिनियल क्षेत्र को स्वच्छ रखे |
ð बल्वल क्षेत्र की शेविंग करे |
ð प्रतिदिन स्नान करने के लिए कहेंगे |
Evaluation :-
.महिला का दर्द कम हो गया |
२ .महिला का पोषण स्तर सामान्य हो गया |
३.महिला की Anxiety कम हो गई |
४.महिला की थकान कम हो गई |
५ महिला की संक्रमण की सम्भावना कम हो गई है |
६.महिला की व्यकितगत स्वच्छता संबंधी समस्या कम हो गई
Health Education :-
ð महिला को पर्याप्त आराम करने के लिए कहेंगे |
ð महिला को अत्यधिक पानी पीने को कहेंगे |
ð मरीज को संक्रमण से बचने को कहेंगे |
ð महिला को भारी काम करने को मना करेंगे |
ð महिला को संतुलित आहार लेने की सलाह देंगे |
ð महिला को मिर्च मसाले एवं अत्यधिक तैलीय भोजन करने से मना करेंगे |
ð मरीज को यदि कोई complication हो तो डॉक्टर को दिखाने की सलाह देंगे |
Complication :-
ð Shock
ð Infection
ð Anemia
ð Death

Summary  :-
Post Partum Haemorrhage  प्रसव की तृतीय अवस्था की एक जटिलता है Definition  :-गर्भाशय शिशु के जन्म के बाद 500ml से ज्यादा रक्तस्राव होना PPH  कहलाता है pph दो प्रकार का होता है | १. Primary PPH  २.secondary PPH pph का कारण अत्यधिक तेज प्रसव होना ,अत्यधिक लम्बा प्रसव होना | इसके लक्षण है | तीव्र रक्तस्राव होना ,बेचैनी ,बेहोशी इसके medical management में oxytocin drug देंगे इसके रोकथाम के उपाय गर्भावस्था के दौरान उपाय Nursing Process Nursing Diagnosis महिला को दर्द होना | health education मरीज को आराम करने के लिये कहेंगे | इसके complication में Infection ,Death आदि |
















Bibliogrophi :-   
1.     प्रीति अग्रवाल , विनोद गुप्ता ,योगेश गुप्ता , text book of Midwifery
{ obstetric and Gynecological } jain Publication 2013 Pege No. 67.1 - 47.11.  
    2.सुरेखा कुमारी मीना / हेमेन्द्र कुमार मीना text book of Midwifery { obstetric and gynecological Nursing} विवेक वर्धन Publication 2017 Page No.433-438.


                                              

No comments:

Post a Comment