MIDWIFERY (OBSTETRIC AND GYNECOLOGICAL NURSING) A PROJECT REPORT USEFULL FOR BSC NURSING


MIDWIFERY (OBSTETRIC AND GYNECOLOGICAL NURSING)


Introduction :-  प्रथमगर्भा में प्रसव की कुल अवधि 12 से 14 घंटे तक बहुप्रसवा में यह अवधि लगभग 6 से 8 घंटे  होती है लेकिन जब प्रसव की प्रथम एयं द्वितीय अवस्था की Combined अवधि 18 घंटे से अधिक होती है तो इस स्थिति को लम्बा प्रसव कहते है | Prolonged labour की समस्या अधिकाशत: प्रथमगर्भा तथा 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं  में पाई जाती है |


Definition :-  . Acc. To Preeti agrwal and vinod gupta .
     विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार :- यदि प्रसव के समय कम से कम चार घंटे के observation के दौरान सरविक्स के विस्तारण की दर 1 सेमी / घंटा से कम तथा गर्भास्थ शिशु के नीचे खिसकने की दर 1 सेमी /घंटा से कम हो तो यह स्थिति लम्बा प्रसव कहलाती है |   
     . Acc .to shurekha kumari Meena / Hemedra kumar – Meena
 यदि labour की अवधि सामान्य अवधि से अधिक होती है तो ऐसा labour prolanged lobour कहलाता है |
3.Acc.to a.s. kohli :-
सामान्य रूप से औरत अगर लेबर की पहली स्टेज में 24 घंटो से ज्यादा रहें तो इसे प्रोलोंगड  या लम्बी प्रसव दर्द कहते है |
लम्बे प्रसव के कारण =>  Prolanged labour के कारणों को प्रसव की अवस्था के आधार पर दो भागों में बाँटा गया |
a.प्रसव की प्रथम अवस्था के prolanged होने के कारण |            
b.प्रसव की द्वतीय अवस्था के Prolanged होने के कारण |                     
प्रसव की प्रथम आवस्था के Prolanged होने के कारण
१. शक्ति में गड़बड़ी => प्रसव प्रक्रिया के सामान्य रूप घटित होने के लिऐ  पर्याप्त एवं प्रभावी गर्भाशयिक संकुचन  की आवश्कता होती है | लेकिन जब इन गर्भाशयिक संकुचन संबंधी निम्न समस्याएं मौजूद होती है | तो प्रसव प्रक्रिया असामान्य रूप से लम्बा हो सकता है |
* गर्भाशयिक इनरशिया
* असमन्वय गर्भाशयिक क्रिया
२. मार्ग में गड़बड़ी  => यहाँ मार्ग से तात्पर्य पेल्विस तथा जनननाल से है मार्ग संबंधी निम्न  गड़बड़ीयां प्रसव प्रकिया को prolanged कर देती है |
*सिर श्रोणि असमानता { cepholopelvic disproportion } गर्भस्थ शिशु के सिर के आकर के सामान्य होने पर पेल्विस के संकीर्ण होने अथवा पेल्विस के आकर के सामान्य होने परन्तु गर्भस्थ शिशु के सिर के अधिक बड़ा होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो सकती है |
सरवाइकल डीस्टोशिया => जब पर्याप्त गर्भाशयिक संकुचनो के बावजूद भी सरविक्स के विस्तारण की डर बहुत कम होती है तो यह स्थिति सरवाइकल डीस्टोसिया कहलाती है |
    पेविल्क गाँठ  => पेविल्क क्षेत्र में ट्यूमर की उपस्थिति  भी प्रसव प्रक्रिया को लम्बा कर देती है |
3.यात्री में गडबडी => यह passanger से तात्पर्य गर्भस्थ शिशु संबंधित निम्न गड़बड़ियां प्रसव प्रक्रिया को लम्बा कर देती है |
* कुगर्भप्रस्तुती => vertex presentation को सबसे सामान्य presentation माना जाता है लेकिन जब गर्भस्थ शिशु का presentation असामान्य प्रकार का जैसा – breech .face .brow compound आदि प्रकार का लम्बा कर देती है |
* गर्भस्त शिशु में जन्मजात विकृतियाँ जैसे  => hydrocephalus, fetal ascites
* मेक्रोसोमिया  => अत्यधिक बड़े आकार का गर्भस्थ शिशु जिसका वजन 4 किलो से अधिक हो मेक्रोसोमिया कहलाता है |
{B} प्रसव द्वतीय अवस्था के Proanged होने के कारण है |
1.शक्ति मे गडबडी => इससे सम्बन्धित निम्न कारण है |
     * गर्भाशयिक निष्क्रयता
     * गर्भवती महिला द्वारा लगाये जाने वाले bearing down effeorts  का कमजोर होना => गर्भस्थ शिशु के delivery के लिया ग्रभाशयिक संकुचनो के साथ –साथ महिला द्वारा लगाये जाने वाले ऐच्छिक बल जिन्हें bearing down efforts कहते है | भी आवश्यक होते है Bearing dorum efforts के अत्यधिक कम होने के कारण भी प्रसव प्रक्रिया लम्बी हो जाती है|
२.मार्ग में गड़बड़ी => यह मार्ग से तात्पर्य पेल्विस तथा जनननाल से है मार्ग सम्बन्धी निम्न गड़बडीयां प्रसव प्रक्रिया को prolanged कर देती है |
     * संकीर्ण पेल्विस
     * सिर श्रोणि असमानता
     * सरवाइकल डीस्टोसिया 
3.यात्री में गड़बड़ी  =>
     * कुगर्भप्रस्तुति – जैसे breech , brow , fece या Compound presentation की    
       उपस्थिति
     * अत्यधिक बड़े आकार का गर्भस्थ शिशु
     * गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकृतियां जैसे – hydrocephalus ,fetal ascites आदि की   
        उपस्थिति
  लक्षण => 1. निर्जलीकरण
           2. मुहँ सुख जाना
            3.अधिक प्रसव पीड़ा होना  => शुरुआत में lobour paoins की अवधि तथा तीव्रता आधिक होती है परन्तु बाद में मांसपेशियों के थक जाने के कारण इनकी तीव्रता कम हो जाती है |
           4.गर्भवती महिला को अत्यधिक थकान हो जाती है |
           5.प्रसव प्रक्रिया की अवधि अधिक हो सकती है |
           6. कीटो – एसिडोसिस
           7. मातृक  ड्रिष्ट्रेश
           8.सरविक्स के विस्तारण तथा गर्भस्थ शिशु के नीचे खिसकने की दर तुलनात्मक                                               बहुत कम होती है | 


 

Prolanged ,labour का Diagnosis :-
·         सरविक्स  के dilatation की दर तुलनात्मक कम होना |
·         गर्भस्थ शिशु के नीचे खिसकने की दर तुलनात्मक कम होना |
·         प्रसव की प्रथम एवं द्वतीय अवस्था की अवधि का बढ जाना |
·         सरविक्स  के विस्तारण एवं प्रसव प्रक्रिया की अवधि की मध्य ग्राफ खीचने पर यह ग्राफ़ alert line एवं एक्शन लायन के बीच में या एक्शन लायन के दांयी ओर आता है |
*Secondary arrest => वह स्तिथि जब प्रसव प्रक्रिया की शुरुआत तो सामान्य तरीके से होती परन्तु सरविक्स के पूर्ण विस्तारण से पूर्व प्रसव प्रक्रिया की प्रगति बहुत धीमी हो जाती है |secondary arrest कहलाती है |
लम्बी प्रसव की जटिलताएँ
{a} मातृक जटिलताऍ
  * निर्जलीकरण  अवं कीटोऐसिडोसिस
  * मातृक डीस्ट्रेस
  * जनननाल में injury होना
  * प्रसव पश्चात् रक्तस्राव
  * सीजेरियन सेक्शन ,कोरसेप्स डिलीवरी अथवा वेंटोज डिलीवरी की सम्भावनाओ का बढ़        
    जाना |
·         माता की मृत्यु
{b} गर्भस्थ शिशु संबंधी  जटिलताएं :-
  * श्वासरोध
  * गर्भस्थ शिशु को चोट लगना
  * फिटस डिस्ट्रेस
  * मेकोनियम चूषण
  * मृत शिशु का जन्म
  * संक्रमण
  * भविष्य में cerebral palsy के develop होने की संभावना 

रोकथाम हेतु उपाय :-
·         गर्भवती महिला को पर्याप्त प्रसव पूर्व भेंट करनी चाहिये |
·         गर्भावस्था के दौरान ही Prolanged labour के जिम्मेदार कारकों { यदि उपस्तिथि हो तो} का पता कर लेना चाहिए तथा  उसी हिसाब से गर्भस्थ शिशु की delivery के लिये  उपयुक्त विधि का चयन करना चाहिय |
·         प्रसव प्रक्रिया के दौरान इसकी प्रगति की Continuously माँनिटरिग की जानी चाहिय |इस हेतु  सरविक्स के विस्तारण { cervical dilatation } तथा गर्भस्थ शिशु के नीचे खिसकने की दर को लगातार  Assess करते रहना चाहिय तथा पारटोग्राफ तैयार करना चाहिय |
·         प्रसव प्रक्रिया का induction आवश्कतानुसर तथा सही समय पर ही करना चाहिये क्योंकि प्रसव प्रक्रिया के प्रारम्भ होने से पूर्व किया गया इंडक्शन ,pralonged labour की संभावना को बढ़ा देता है इसके अलावा sedative दवाइयों का उपयोग भी सही समय पर ही करना चाहिय |

प्रबन्धन { Management} :-
{A} गर्भवती महिला तथा गर्भस्थ शिशु का Assessment
1.गर्भवती महिला तथा गर्भस्त शिशु की well being का पता करने हेतु इनकी सावधानी –पूर्वक Monitaring की जानी चाहिय |
2.vaginal examination द्वारा सरविक्स के विस्तारण तथा गर्भस्थ शिशु के presenting part कि स्थिति का पता करना चाहिय |
3.प्रसव प्रक्रिया की प्रगति को assess करने के लिऐ सरविक्स के विस्तारण तथा गर्भस्थ शिशु  के नीचे खिसकने की दर को monitar करना चाहिय तथा पारटोग्राफ पर चिन्हित करना चाहिय|
4.गर्भवती महिला द्वारा ली गई दर्द निवारक दवाइयों सेडेटिव दवाईयों आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिय |
5. गर्भस्थ शिशु के आकार ,गर्भप्रस्तुति .स्थिति मौजूद जन्मजात विक्रतियों आदि के बारे में पता करने के लिय आवश्यक परीक्षण करने चाहिय |
6.इलेक्ट्रोनिक क्रीटल मंनीटर द्वारा fetal heart sound का परिश्रवण करना चाहिय |
7.गर्भाशायिक संकुचनो की अवधि .तीव्रता तथा आवृति का assessment करना चाहिय |
8.गर्भवती महिला में निर्जलीकरण किटोएसिडोसिस अत्यधिक बेचैनी आदि की उपस्थिति को    assess करना चाहिये |
९. गर्भवती महिला के vital sign’s तथा general health status को बार – बार assess करना चाहिए|

B. सामान्य प्रबन्ध :-
1. किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए प्रसव प्रक्रिया  के दौरान अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ शिशु रोग विशेषज्ञ रोग तथा एनेस्थेटिस्क मौजूद होना चाहिय |
2. निर्जलिकरण  तथा तथा कीटो – एसिडोसिस के उपचार हेतु iv मार्ग द्वारा रिगर लिक्टेट प्रारम्भ करनी चाहिय |
3. महिला को शांत एवं आरामदायक वातावरण में आरामदायक position प्रदान करनी चाहिऐ|
4. महिला को अवश्याकतानुसार दर्द निवारण हेतु analgesic drugs जैसे पेथीडीन IM मार्ग द्वारा देनी चाहिय |
5. प्रसव प्रक्रिया के prolanged हो जाने करण महिला में संक्रमण की संभावना रहती है {विशेष तौर पर झिल्लियो के कट जाने के बाद } अत: गर्भवती महिला को कम से कम प्रत्येक दो घंटे बाद मूत्र त्यागने के सलाह देनी चाहिय | यदि महिला toilet तक जाने में असमर्थ हो तो bed pan की व्यवस्था करनी चाहिय| अवश्याकतानुसार महिला को कैथेट्राईज करना चाहियें |

C. प्रसूति प्रबंधन:-
   १. यदि अपर्याप्त गर्भशयिक  संकुचनो के करण प्रसाब की प्रथम अवस्था prolanged हो रही है तो A.R.M करने के बाद आँक्सीटोसिन ड्रिप प्रारंभ कर देनी चाहिय| vaginal delivery करनी चाहिय अवश्याकतानुसार delivery के दौरान farceps या ventouse का उपयोग करना चाहिय|
2. vaginal delivery के दौरान अवश्याकतानुसार एपीजिओटोमी करनी चाहिय|
3. secondary arrest के दौरान आँक्सीटोसिन ड्रिप प्रारंभ कर vaginal delivery की जा सकती है|
4. vaginal delivery करने से पूर्व संकीर्ण श्रोणि सिर श्रोणि असमानता मेक्रासोमिया गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकृतियों जैसे hydrocephalus . fetal ascites अदि की अनुपस्थिति को सुनिश्चित कर लेना चाहिय |
5. प्रसव के द्वतीय अवस्था के prolanged होने की स्तिथि में एपीजियोटोमी forepps या ventous द्वारा delivery करनी चाहिय |
   सीजेरियन सेक्शन :-
1.prolanged labour के दौरान निम्न स्तिथियों में सीजेरियन सेक्शन करना चाहिये |
2.मातृक डिस्ट्रेस की उपस्थिति |
3.सिर श्रोणि की असमानता |
4.कुगर्भ प्रस्तुति जैसे –breech shoulder ,brow presentation आदि |
5.जब एमिनओटोमी तथा आँक्सीटोसिन ड्रिप के प्रारंभ करने के बाद भी प्रसव प्रक्रिया में प्रगति नही हो रही है |
6.मेक्रोसोमिया

Summary
Definition => यदि labour की अवधि सामान्य अवधि से अधिक होती है तो ऐसा lbour Prolanged lobour कहलाता है |
Etiology =>  - प्रथम बार माँ बनना
             - अवरोधित प्रसव
             - स्त्री द्वारा जोर न लगाना   
             - सकरी श्रोणि
Clinical manifestation => - निर्जलीकरण
-    मुहँ सूख जाना
Diagnosis => सरविक्स के dilatation की तुलनात्मक दर कम होना |
          -गर्भस्थ शिशु के नीचे खिसकने की दर तुलनात्मक कम होना |
Complication => - निर्जलीकरण
                  मातृक डिस्ट्रेस
                  माता की मृत्यु
                  श्वासरोध
रोकथाम => - गर्भवती महिला को पर्याप्त प्रसव पूर्व भेट करनी चाहिय |
management => गर्भवती महिला तथा गर्भस्थ शिशु की well being का पता करने हेतु इनकी सावधानी पूर्वक monitaring करनी चाहिय |


Bibliogrophy
1.  “preeti Agrwal and vinod gupta “ text book   “Midwifery { obstetric and gynecologicalNursing } jain Publication 2017 page No.61.2-62.4
2.  “Surekha kumari meena and Hemendra kumar meena “A text book midwifery {obstetric and gynecological nursing } vandhan publication edition 2017 page no.412-414.
3.  A.S. kohali A text book “ Midwifery { obstetric and gynecological Nursing}
Lolus publication “Edition – 2016 page no.184-185 .

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